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अर्गला स्तोत्रम् अर्थ सहित (दुर्गा सप्तशती)

देहि सौभाग्यमारोग्यं (सौभाग्यम-आरोग्यं) देहि मे परमं सुखम्।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥ १२॥

मुझे सौभाग्य और आरोग्य (स्वास्थ्य) दो।
परम सुख दो।
मुझे ज्ञान, विजय और यश दो और
काम-क्रोध आदि शत्रुओं का नाश करो॥

अर्गला स्तोत्रम् अर्थ सहित


हनुमान चालीसा – अर्थ सहित

नासै रोग हरे सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

संकट ते हनुमान छुडावै।
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥

हे वीर हनुमान जी,
आपके नाम का निरंतर जप करने से
सब रोग नष्ट हो जाते हैं और
सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

जो व्यक्ति मन-कर्म-वचन से
आपका ध्यान करते हैं,
उनके सब संकटों को
आप दूर कर देते हैं।

हनुमान चालीसा – अर्थ सहित


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