Darshan Do Ghanshyam Nath – Lyrics in Hindi
दर्शन दो घनश्याम नाथ,
मोरी अंखियाँ प्यासी रे
मन मंदिर की ज्योत जगा दो,
घट घट वासी रे
मंदिर मंदिर मूरत तेरी,
फिर भी न दिखे सूरत तेरी
दर्शन दो घनश्याम नाथ,
मोरी अंखियाँ प्यासी रे
मन मंदिर की ज्योत जगा दो,
घट घट वासी रे
मंदिर मंदिर मूरत तेरी,
फिर भी न दिखे सूरत तेरी
दर्शन दो घनश्याम नाथ,
मोरी अंखियाँ प्यासी रे
मन मंदिर की ज्योत जगा दो,
घट घट वासी रे
मंदिर मंदिर मूरत तेरी,
फिर भी न दिखे सूरत तेरी
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
जन्मो पे जनम लेकर मै हार गया मोहन
दर्शन बिन व्यर्थ हुआ हर बार मेरा जीवन
अब धैर्य नहीं मुझमे इतना तू परखता है
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
जन्मो पे जनम लेकर मै हार गया मोहन
दर्शन बिन व्यर्थ हुआ हर बार मेरा जीवन
अब धैर्य नहीं मुझमे इतना तू परखता है
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
दिलबर की अदा निराली है
दिल छीन लिया उसने मेरा
प्यारे की सूरत प्यारी है
दिन रात तड़पता रहता हु
घनश्याम तुम्हारी यादो में
हे सर्वेश्वर, हे कृष्णा प्रिय
आकर के बाह पकड़ मेरी
माया ने मुझको घेरा है
दिलबर की अदा निराली है
दिल छीन लिया उसने मेरा
प्यारे की सूरत प्यारी है
दिन रात तड़पता रहता हु
घनश्याम तुम्हारी यादो में
हे सर्वेश्वर, हे कृष्णा प्रिय
आकर के बाह पकड़ मेरी
माया ने मुझको घेरा है
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