Ram Raksha Stotra with Meaning
चरितं रघुनाथस्य शतकोटि-प्रविस्तरम्।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्॥1॥
जो नीलकमल के समान श्यामवर्ण, कमलनयन
उन अजन्मा और सर्वव्यापक भगवान रामजी का स्मरण करे
चरितं रघुनाथस्य शतकोटि-प्रविस्तरम्।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्॥1॥
जो नीलकमल के समान श्यामवर्ण, कमलनयन
उन अजन्मा और सर्वव्यापक भगवान रामजी का स्मरण करे
शंकर मेरा प्यारा, शंकर मेरा प्यारा॥
माँ री माँ मुझे मूरत ला दे,
शिव शंकर की मूरत ला दे।
मूरत ऐसी जिस के सर से
निकले गंगा धारा॥
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शंकर मेरा प्यारा, शंकर मेरा प्यारा॥
माँ री माँ मुझे मूरत ला दे,
शिव शंकर की मूरत ला दे।
मूरत ऐसी जिस के सर से
निकले गंगा धारा॥
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शान्ताकारं भुजगशयनं
पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं
मेघवर्ण शुभाङ्गम्।
चरितं रघुनाथस्य शतकोटि-प्रविस्तरम्।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्॥1॥
ध्यात्वा नीलोत्पलश्याम रामं राजीवलोचनम।
जानकी लक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम॥2॥
आओ महिमा गाए भोले नाथ की
भक्ति में खो जाए भोले नाथ की
भोले नाथ की जय, शम्भू नाथ की जय
गौरी नाथ की जय, दीना नाथ की जय
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आओ महिमा गाए भोले नाथ की
भक्ति में खो जाए भोले नाथ की
भोले नाथ की जय, शम्भू नाथ की जय
गौरी नाथ की जय, दीना नाथ की जय
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