Satguru – Kabir Dohe – Hindi

– सतगुरु सम कोई नहीं, सात दीप नौ खण्ड।
– सतगुरु तो सतभाव है, जो अस भेद बताय।
– तीरथ गये ते एक फल, सन्त मिले फल चार।
– सतगुरु खोजो सन्त, जोव काज को चाहहु।

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Bhakton Ka Sapna Hai Ye Milkar Banayenge

भक्तो का सपना है ये, मिलकर बनाएँगे।
करले सुणवाई अबके, फागण चढ़ाएंगे।
ये दुनिया देखे तो बोले, है ये बड़े ही ज़ोर का।
बागा पहनाए तुमको छप्पन करोड़ का॥

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